राजनिति

राजा दो सींग’ ने रंगमंच पर सत्ता के दमनकारी चरित्र को किया उजागर, जन संस्कृति मंच के बिहार राज्य सम्मेलन में ‘रंगनायक द लेफ्ट थियेटर’ की शानदार प्रस्तुति

समस्तीपुर। जन संस्कृति मंच के बिहार राज्य सम्मेलन के अवसर पर रविवार 28 सितम्बर की रात, समस्तीपुर कॉलेज भवन में प्रसिद्ध रंगकर्मी दीपक सिन्हा के निर्देशन में रंगसंस्था ‘रंगनायक द लेफ्ट थियेटर, बेगूसराय’ ने लोककथा आधारित नाटक ‘राजा दो सींग’ का प्रभावशाली मंचन किया। नाटक की प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा और समकालीन सामाजिक सरोकारों के साथ सत्ता के दमनकारी चरित्र को प्रभावी ढंग से सामने रखा।

नाटक की कथा राजा के सिर पर निकले दो सींग और उसके रहस्य के इर्द-गिर्द घूमती है। बाल काटने के दौरान नाई पमपम हजाम राजा के सिर पर सींग देख लेता है। राजा के आदेश के बावजूद यह रहस्य सामने आ जाता है, जिसके बाद पमपम हजाम और सत्तापरस्त कलाकार को फांसी की सजा सुनाई जाती है। नाटक के माध्यम से सत्ता, भय, झूठ और दमन की प्रवृत्तियों पर तीखा व्यंग्य किया गया।

नाटक का लेखन एवं निर्देशन दीपक सिन्हा ने किया। राजा की भूमिका यथार्थ सिन्हा ने निभाई, जबकि पमपम हजाम के किरदार में देवेंद्र कुंवर ने प्रभावशाली अभिनय किया। भूषण भारती ने दरबारी, निखिल कुमार ने अंगरक्षक, संजय कुमार ने मंत्री तथा पंकज कुमार सिन्हा ने संगीतज्ञ की भूमिका निभाई।

संगीत पक्ष की जिम्मेदारी वरिष्ठ रंगकर्मी विजय कुमार सिन्हा ने संभाली। ढोलक पर प्रमोद पंडित, सहगायन में दिलीप भारद्वाज एवं अमित मेहता तथा हारमोनियम पर सूर्यप्रकाश ने सहयोग दिया।

नाटक के जरिए वर्तमान दौर की लूट, झूठ और फासीवादी सत्ता-संस्कृति के खिलाफ प्रतिरोध का संदेश दिया गया। कलाकारों ने जीवंत अभिनय के माध्यम से सत्ता के दमन, सामाजिक विसंगतियों और आम जनता के संघर्षों को मंच पर उकेरा। प्रस्तुति के बाद दर्शकों ने कलाकारों का जोरदार तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया।

मंचन के बाद कवि-साहित्यकार एवं जन संस्कृति मंच के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि मोबाइल और आभासी दुनिया के बढ़ते प्रभाव के बीच लोगों की जिंदगी लगातार उससे घिरती जा रही है। ऐसे समय में सांस्कृतिक गतिविधियों तथा जनपक्षधर कला-साहित्य का महत्व और बढ़ गया है। रंगमंच समाज को सोचने, सवाल करने और बदलाव की दिशा में प्रेरित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
नाटक के सफल मंचन से सम्मेलन में मौजूद साहित्यकारों, सांस्कृतिक कर्मियों और कला प्रेमियों में उत्साह का माहौल देखा गया।

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