
समस्तीपुर। जिले के एक निजी अस्पताल में इलाज को लेकर मरीज और उसके परिजनों द्वारा हंगामा करते हुए, माता चंद्रकला अस्पताल के डॉक्टर व अस्पताल के कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन व चिकित्सक की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उजियरपुर थाना क्षेत्र के बिरनामातुला गांव निवासी मरीज ऋषिकेश कुमार के परिजनों ने माता चंद्रकला अस्पताल के डॉक्टर डीके शर्मा पर यह आरोप लगाया है कि, एक हादसे में पिड़ित युवक ॠषिकेश कुमार के पैर की हड्डी टूट गयी थी। जिसे इलाज के लिए माता चंद्रकला अस्पताल मोहनपुर समस्तीपुर में भर्ती कराया गया था।
जहां डॉक्टर के द्वारा उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि, उनके मरीज पर अगर एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च किया जाए तो, मरीज पूरी तरह ठीक होकर चलने लगेगा, लेकिन आज 25 दिन बीत जाने व करीब एक लाख रूपए ईलाज पर खर्च कर देने के बावजूद, उनके मरीज की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, जबकि ईलाज के नाम पर मरीज अभी भी उनके अस्पताल में भर्ती ही है।
25 दिन बाद जब उनलोगों ने डॉक्टर से इस मामले में बातचीत किया तो, डॉक्टर ने कहा कि, मरीज का पैर काटना पड़ सकता है। जिसके बाद मरीज के परिजनों का गुस्सा भड़क गया, और वहलोग अस्पताल परिसर में ही हंगामा करने लगे।
उधर हंगामे की सूचना मिलने के बाद मुफस्सिल थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। इस दौरान मरीज के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि। इलाज के नाम पर लाखों रुपये खर्च कराने के बाद डॉक्टर द्वारा मरीज को आगे के उपचार के लिए पटना रेफर कर दिया गया।इस पूरे घटनाक्रम के बाद परिजनों ने इलाज की प्रक्रिया, ईलाज के दौरान होने वाले खर्च और मरीज की वर्तमान स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
पैर काटे जाने का आरोप जो परिजन द्वारा लगाया जा रहा है, वह आरोप बिलकुल गलत है। पैर काटने जैसी कोई बात नहीं थी। अस्पताल में मरीज का ड्रेसिंग हो रहा था। घाव ठीक हो जाने के 3-4 दिन के बाद उसके पैर का स्किन ग्राफ्टिंग होना था, लेकिन मरीज के परिजन पेशेंस नही रख पा रहे थे। मरीज के साथ प्लास्टिक सर्जरी का काम होना था, हड्डी का कोई काम बचा हुआ नही था। हालांकि मरीज के परिजन द्वारा दबाब बनाने के कारण उसे यहां से छुट्टी दे दी गयी। डॉ डीके शर्मा हड्डी रोग विशेषज्ञ (माता चंद्रकला हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर)

