मौसम पूर्वानुमान: 26 से 30 सितंबर तक मौसम में बदलाव के आसार, कई जिलों में बारिश की संभावना, पूसा मौसम विभाग ने किसानों को फसल एवं पशुपालन को लेकर जारी की समसामयिक सलाह

समस्तीपुर। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से 26 से 30 सितंबर 2026 तक के लिए मध्यावधि मौसम पूर्वानुमान जारी किया गया है। पूर्वानुमान के अनुसार इस अवधि में आसमान में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना है। चक्रवात के प्रभाव के कारण 26 सितंबर की देर सुबह तक मौसम में बदलाव बना रह सकता है।
26 सितंबर की सुबह तक अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं सीवान, गोपालगंज, समस्तीपुर तथा पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के कुछ स्थानों पर गरज के साथ अच्छी बारिश हो सकती है।
तापमान में गिरावट के संकेत
मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक इस अवधि में अधिकतम तापमान 23 से 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 85-95 प्रतिशत तथा दोपहर में 60-65 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। हवा मुख्यतः पूर्वी या दक्षिण-पूर्वी दिशा से 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलने की संभावना है।
मौसमीय वेधशाला पूसा के अनुसार पिछले तीन दिनों में औसत अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहा। इस दौरान कुल 71.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
धान में गंधी बग की निगरानी की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की फसल में गंधी बग के प्रकोप की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। इसके प्रकोप से धान के दाने सफेद एवं खोखले हो सकते हैं। प्रकोप दिखाई देने पर मौसम की स्थिति को देखते हुए सुबह या शाम फोलिडोल चूर्ण 10-15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
मक्का की फसल में नत्रजन की अंतिम मात्रा देने का यह उपयुक्त समय बताया गया है। बेहतर वृद्धि और उत्पादन के लिए 30 किलोग्राम नत्रजन प्रति हेक्टेयर की दर से अंतिम उपरिवेशन करने की सलाह दी गई है।
मूली, फूलगोभी और पत्तागोभी की खेती पर जोर
मौसम अनुकूल होने पर तोरी के लिए खेत तैयार करने की सलाह दी गई है। वहीं किसानों को मूली की बुआई शुरू करने को कहा गया है। इसके लिए 7-8 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज दर और 30×10 सेंटीमीटर की दूरी रखने की सलाह दी गई है।
फूलगोभी की मध्य अवधि वाली किस्मों पूसा हिम ज्योति, डी-96 एवं पंत शुभ्रा की रोपाई अगले कुछ दिनों में करने की सलाह दी गई है। पत्तागोभी के लिए उत्तर बिहार में पूसा ड्रम हेड एवं पूसा अगेती किस्मों की बुआई की जा सकती है।
खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की सलाह
कृषि विभाग की ओर से किसानों को सब्जियों एवं अन्य फसलों के खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करने को कहा गया है। जल निकासी के बाद खेतों में उचित नमी आने पर ही रबी फसलों के लिए खेत की तैयारी और बुआई शुरू करने की सलाह दी गई है।
पशुओं की साफ-सफाई पर दें विशेष ध्यान
पशुपालकों को थनैला (मास्टाइटिस) रोग से बचाव के लिए पशुओं के पैरों की साफ-सफाई, दुग्ध दोहन के बाद थनों की सफाई तथा पशुशाला में स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी गई है। प्रत्येक पशु को प्रतिदिन 50 ग्राम खनिज मिश्रण देने की भी सलाह दी गई है। दूध के पीएच मान में असामान्यता पाए जाने पर पशु चिकित्सक की सलाह से उपचार कराने को कहा गया है।

