समस्तीपुर नगर निगम के वार्ड 38 में जड़ समेत उखड़ा विशाल पेड़, किसान की धान फसल बर्बाद; सरकारी पेड़ की बिक्री पर भी उठ रहे सवाल

समस्तीपुर। समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र के लगुनियां सूर्यकंठ गांव स्थित वार्ड संख्या 38 में, दलित बस्ती के पास ब्रह्म स्थान के समीप खड़ा एक विशाल पेड़, पिछले तीन दिनों से जारी आंधी-तूफान और बारिश के बीच, जड़ समेत उखड़कर धान के खेत में जा गिरा। पेड़ गिरने से खेत में लगी धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं पेड़ का हिस्सा सड़क पर भी गिर जाने से कुछ समय तक आवागमन बाधित रहा और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पेड़ काफी बड़ा था। जिसकी वजह से तेज हवा और बारिश के कारण अचानक पेड़ जमीन से जड़ सहित उखड़ गया, और पास के किसान अभिषेक चौधरी के धान के खेत में जा गिरा। पेड़ के गिरने से किसान की तैयार हो रही धान की फसल का बड़ा हिस्सा दबकर क्षतिग्रस्त हो गया। इससे किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
सड़क किनारे खेत में गिरे सरकारी पेड़ को काटकर बेचा किसने
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर इस पेड़ को लेकर एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि, सड़क किनारे खड़ा उक्त सरकारी पेड़ गिरने के बाद कुछ लोगों द्वारा उसे कथित रूप से, वन माफिया को औने-पौने दाम में बेच दिया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि, यदि पेड़ सरकारी भूमि अथवा सरकारी परिसर से संबंधित था तो, उसे काटकर या हटाकर बेचने की अनुमति किसने दिया? पेड़ की लकड़ी से प्राप्त राशि का इस्तेमाल किस मद में किया गया है, और किसके द्वारा किया गया है ?
फसल नुकसान झेल रहे किसान को अब तक मुआवजा नहीं
दूसरी ओर, जिस किसान के खेत में पेड़ गिरने से धान की फसल बर्बाद हुई है, उसे अब तक किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिलने की बात सामने आ रही है। किसान के सामने प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के बाद, अब यह सवाल भी खड़ा है कि फसल क्षति का आकलन कौन करेगा और किसान को मुआवजा कौन देगा?
ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ हटाने के लिए वन विभाग को जानकारी दी गई थी, लेकिन विभागीय स्तर पर मौके पर निरीक्षण करने कोई अधिकारी या कर्मी नहीं पहुंचा। हालांकि, इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान भी सामने नही आया है।
जांच हुई तो सामने आ सकता है पूरा मामला:- घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या पेड़ वास्तव में सरकारी था ?
पेड़ गिरने के बाद उसे किसने हटाया और किसके निर्देश पर लकड़ी बेची गई? लकड़ी की बिक्री से कितनी राशि प्राप्त हुई और वह राशि कहां जमा की गई ? क्या पेड़ की कटाई एवं निस्तारण के लिए कोई विभागीय अनुमति ली गई थी या नही? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल कि, जिस किसान के धान की फसल क्षतिग्रस्त हुई, उसे नुकसान का मुआवजा कब और किस मद से मिलेगा?
स्थानीय ग्रामीणों ने पूरे मामले की वन विभाग एवं नगर निगम के स्तर से जांच कराने, पेड़ की बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने तथा पीड़ित किसान की फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। अब देखना यह है कि, संबंधित विभाग इस मामले में जांच कर सरकारी पेड़ की लकड़ी की बिक्री और किसान की फसल क्षति से जुड़े सवालों का जवाब देता है या मामला यूं ही दबकर रह जाता है।




